पानी गरम हो गया,हां ले जाइए अरे! दे दो ना मैं उघेले बदन खड़ा हूं ठंड लग रही है। अच्छा रुकिए लाती हूं।फिर क्या रीमा आटा लगे हाथ से पानी का भगोना पकड़ा आई।इतने में कमरे से आवाज़ आई,बहूं एक गिलाग गरम पानी दे दो दवा खाना है ,जी मां जी लाई वो पकड़ा ही रही थी कि बेटे ने आवाज़ लगाई मां नाश्ता बन गया क्या?
News capsule
Saturday, 20 January 2024
हिंदी कहानी/हिंदी इमोशनल कहानी/लव स्टोरी हिंदी में/
Monday, 13 November 2023
IAS Motivational Shayari/Motivational Quotes/Motivational Shayari
1. सफलता की कहानी एक-दो रात में नही लिखी जाती है. अनगिनत रातों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर पढ़ना पड़ता है. हर दिन निराशा, उदासी, समाज के ताने जैसी मुसीबतों से आँखे मिलाना पड़ता है. हर मुसीबत को एक अवसर में बदलना पड़ता है. अज्ञात राहों पर अकेले चलना पड़ता है. अपनी सोच को बदलना पड़ता है. IAS की तैयारी में बहुत सारा त्याग और परिश्रम करना पड़ता है.अगर मेहनत करने से कतराते हो,
तो दम किस बात का दिखाते हो, आईएएस की तैयारी के लिए पैसों की नही,आत्मविश्वास और उत्साह की जरूरत होती है. यही बात युवा लड़कियों की प्रेरणा बन गई,
एक लड़की फिर आईएएस टॉपर निकल गई.इस धरती माँ का हर कर्ज चुकाना है,
IPS बनकर इमानदारी से फर्ज निभाना है. जो आईपीएस बनने की ठानते है,
वो कब किसी का कहा मानते है.जिन्दगी में डर सबको लगता है,
पर हर कोई लक्ष्य के पीछे भगता है. जब कई जन्मों का पूण्य फलता है,
तब कोई घर में आईएएस बनता है.
आईएएस की तैयारी करने की ठानी है,
परिश्रम करके सफलता कैसे पाई जाती है
मिशाल बनकर यह पूरी दुनिया को दिखानी है. तुम तो अपने दोस्तों से घंटे भर बातें करते हो,
क्या तुम सच में आईएएस की तैयारी करते हो. जिन आँखों में दिन-रात आईएएस का ख्वाब पलता है,
उन्हें कोई न कोई सरकारी नौकरी जरूर मिलता है.
तो दम किस बात का दिखाते हो, आईएएस की तैयारी के लिए पैसों की नही,
आत्मविश्वास और उत्साह की जरूरत होती है. यही बात युवा लड़कियों की प्रेरणा बन गई,
एक लड़की फिर आईएएस टॉपर निकल गई.इस धरती माँ का हर कर्ज चुकाना है,
IPS बनकर इमानदारी से फर्ज निभाना है. जो आईपीएस बनने की ठानते है,
वो कब किसी का कहा मानते है.जिन्दगी में डर सबको लगता है,
पर हर कोई लक्ष्य के पीछे भगता है. जब कई जन्मों का पूण्य फलता है,
तब कोई घर में आईएएस बनता है.
वही आईएएस की तैयारी के लिए घर से निकलते है. जिन आँखों में IAS के ख्वाब बस जाते है,
उन आँखों में महबूबा की तस्वीर नही बस्ती है. IAS की तैयारी में विद्यार्थी इतना परिश्रम करते है,
कि निराशा और उदासी तो उनके पैर छूने आते है.
पिता की दौलत/Father's wealth
गांव में अकेले रहते बूढ़े पिता की मृत्यु हुई, तो विभिन्न शहरों में बसे दोनों भाई पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव पहुंचे.
सब कार्य सम्पन्न हुए. कुछ लोग चले गए थे और कुछ अभी बैठे थे कि बड़े भाई की पत्नी बाहर आई और उसने अपने पति के कान में कुछ कहा.
बड़े भाई ने अपने छोटे भाई को भीतर आने का इशारा किया और खड़े होकर वहां बैठे लोगों से हाथ जोड़ कर कहा, ”अभी पांच मिनट में आते है.”
दोनों की स्त्रियां ससुरजी के कमरे में थी. भीतर आते ही बड़े भाई ने उनसे फुसफुसाकर कर पूछा, “बक्सा छुपा दिया था ना.”
“हां, बक्सा हमारे पास है. चलिए जल्दी से देख लेते हैं नहीं तो कोई आसपास का हक़ जताने आ जाएगा और कहेगा कि तुम्हारे पीछे हमने तुम्हारे बाबूजी पर इतना ख़र्च किया वगैरह वगैरह. क्यों देवरजी…” बड़े की पत्नी ने हंसते हुए कहा.
“हां सही कहा भाभी.” कहकर छोटे ने भी सहमति जताई.
बड़ी बहू ने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और छोटी ने तेज़ी से बाबूजी की चारपाई के नीचे से एक बहुत पुराना बक्सा निकाला.
दोनों भाई तुरंत तेज़ी से नीचे झुके और बक्से को खोलने लगे.
“अरे, पहले चाबी तो पकड़ो, ऐसे थोड़े ना खुलेगा. मैंने आते ही ताला लगाकर चाबी छुपा ली थी.”
बड़ी बहू ने अपने पल्लू के एक छोर पर बंधी हुई चाबी निकाली और अपने पति को पकड़ा दी.
बक्सा खुलते ही वहां मौजूद चारों बक्से पर झुक गए.
उन्हें विश्वास था कि इसमें मां के गहने, अन्य बहुमूल्य वस्तुएं होंगी.
परंतु बक्से में तो बड़े और छोटे की पुरानी तस्वीरें, छोटे-छोटे कुछ बर्तन, उन्हीं दोनों के छोटे-छोटे कपड़े सहेजकर रखे हुए थे.
उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई ये सब भी भला सहेजकर रखता है.
चारों के चेहरे निराशा से भर गए. तभी छोटे भाई की नज़र बक्से के कोने में कपड़ों के बीच रखी एक कपड़े की थैली पर गई. उसने तुरंत आगे बढ़कर उस थैली को बाहर निकाला. ये देखकर सबकी नज़रों में अचानक चमक आ गई. सभी ने लालची नज़रों से उस थैली को टटोला.
छोटे भाई ने उस थैली को वहीं ज़मीन पर पलट दिया.
उसमें कुछ रुपए थे और साथ में एक काग़ज़ जिस पर कुछ लिखा हुआ था. छोटे भाई ने रुपए गिने, तो लगभग बीस हज़ार रुपए थे.
"बस… और… कुछ नहीं है."
“अरे, इस काग़ज़ को पढ़ो, ज़रुर किसी बैंक अकाउंट या लॉकर का विवरण होगा.” बड़ी बहू ने कहा, तो बड़े बेटे ने तुरंत छोटे के हाथों से उस काग़ज़ को छीनकर पढ़ा.
उस पर लिखा हुआ था- 'क्या ढूंढ़ रहे हो?.. संपत्ति…?
हां… ये ही है मेरी और तुम्हारी मां की संपत्ति. तुम दोनों के बचपन की वो यादें, जिसमें तुम शामिल थे. वो ख़ुशबू, वो प्यार, वो अनमोल पल, आज भी इन कपड़ों में, इन तस्वीरों में इन छोटे-छोटे बर्तनों में मौजूद हैं. यही है हमारी अनमोल दौलत… तुम तो हमें यहां अकेले छोड़ कर चले गए थे अपना भविष्य संवारने.
मगर हम यहां तुम्हारी यादों के सहारे ही जिए… तुम्हारी मां तुम्हें देखने को तरस गई और शायद मैं भी… अब तक तुमसे कोई पैसा नहीं लिया. अपनी पेंशन से ही सारा घर चलाया, पर तुम लोगों को हमेशा ‘इस बक्से में अनमोल दौलत है’ जान-बूझकर सुनाता रहा. मगर बच्चों ध्यान देना अपने बच्चों को कभी अपने से दूर मत करना, वरना जैसे तुमने अपने भविष्य का हवाला देकर हमें अपने से दूर किया वैसे ही… दुनिया का सबसे बड़ा दुख जानते हो क्या होता है?… अपनों के होते हुए भी किसी अपने का पास नहीं होना. जीवन में उस समय कोई दौलत-गहने, संपति काम नहीं आते.
बच्चों मरने के बाद भी मैं तुम पर बोझ नहीं बनना चाहता, इसलिए ये पैसे मेरे अंतिम संस्कार का ख़र्च है…'
पूरा काग़ज़ पढ़ते ही बड़े बेटे के साथ-साथ छोटा बेटा भी फूट-फूटकर रो पड़ा.
Imotional shayari/morning shayari/mohabbat shayari
तुम्हारी याद मे मैं कितनी रात जगी
छोड़कर हर खुशी को बस तुम्हारी खुशी देखी
रात निकल जाती है रोते रोते
सुबह उठकर फिर सबसे छुपकर अपना मुँह धोते
अब सोचती हूँ क्या कहुँ तुझे
क्योंकि मैं जो भी कहूँ, झूठ लगता है तुझे
Ishq shayari, Dard shayari, shayari, mohabbat shayari 2023
एक शख्स है, दूर बैठा हुआ मुझको सताता बहुत बहुत है
जानता है हाल मेरा, फिर भी मुझको तड़पाता बहुत है
जानता है मरती हूं उसपे, तब भी मुझको आजमाता बहुत है
हंसता हुआ है एक चेहरा, जो मुझ को रुलाता बहुत है।।
बड़ा वक़्त गुज़रा की,
इश्क़ के सिवा कुछ किया नहीं,
कुछ मोहलत और दो मुझे,
ये नए सलीके सीखने के लिए!!
ये जो मेरा वहम सा है,
ज़रा पैरहन से झाड़ने दो मुझे,
बाकी जो दिल में है,
उसे वक़्त चाहिए निकालने के लिए!!
तुम तो बदले पर हर कोई,
ऐसा दिलदार कहाँ होता है,
लोग मेरे जैसे भी हैं,
जिन्हें वक़्त लगता है बदलने के लिए!!
रम गया हूँ उन लम्हों में मैं,
क़ैद होता है भंवरा पंखुड़ियों में जैसे,
बस उस सुबह का इंतज़ार मुझे,
इन अँधेरी दीवारों से रिहाई के लिए!!
मेरे बातों से सहमत न भी हो,
पर प्यार तो तुम्हें भी था,
उस प्यार का वास्ता है तुम्हें,
मुझे वक़्त दो ज़रा ढलने के लिए!!
ये जो मर्ज़-ए-इश्क़ है,
परेशान इससे मैं खुद भी हूँ,
पर अब हो तो गया है,
लगेंगे कुछ रोज़ अभी ठीक होने के लिए!!
जो भी किया ज़िन्दगी में,
मेरे दोस्त बेइंतिहां किया मैंने,
मेरे जज़्बातों को कुछ वक़्त तो दो,
जल के ख़ाक होने के लिए!!
गिनते हैं आखिरी कुछ साँसे,
ये घायल पड़े जज़्बात मेरे,
क़ब्र तैयार है इनकी मेरे यार,
ज़रा कंधा तो दो दफनाने के लिए!!
मैं तो वो परिंदा हूँ जिसकी न कोई शाख है
न ही आसमां कोई,
इस जहां में न मिला अपना, और उस जहां में
है बसता कहाँ मेरा कोई!!
सूखे ठूँठ पर बना के आशियाना अपनी तो
जैसे तैसे होती है गुज़र,
चाँद तारों से होती है बात रोज़, पर सिरहाने
रखता नहीं हाथ कोई!!
वैसे तो आदत थी मेरी अकेले ही होती थी
मजे से गुज़र,
कोई आ के छुड़ा गया ये आदत मेरी, उसके बाद से
नहीं है उसकी भी खबर कोई!!
शायद अब किसी और की ज़िन्दगी का सहारा
बन गया हो वो,
वो खुश है तो यही तो थी दुआ मेरी, नहीं है मुझे
उससे गिला कोई!!
ऐ हवा, तू उनके कूँचों से तो अब भी गुज़रती होगी,
अपने झोंकों से उसकी ज़ुल्फ़ों को सहलाती होगी!!
उसके गालों, उसकी हथेलियों को छु के गुज़रती होगी,
उसकी ठंडी पड़ी तमन्नाओ को एक बार फिर जगाती होगी!!
क्या करती है तू कभी गुफ़्तगू उनसे मेरी तरह,
क्या वो भी बेक़रार है मुझसे मिलने के लिए मेरी तरह!!
या फिर अब भी मुझसे नफरत है उन्हें मेरी तरह,
भूल चुकी है या अब भी याद करती है वो मुझे मेरी तरह!!
ऐ हवा, हो सके तो उसे मेरा पैग़ाम दे देना,
अब भी जागता हूँ रातों में ज़रा उससे कह देना!!
दुआ अब भी करता हूँ उसकी खुशिओं के लिए,
मेरी तरफ से उसके सर पे ज़रा अपना हाथ रख देना!!
मेरा कोई ठिकाना नहीं, जाने कब कहाँ चला जाऊं,
तेरा एहसान होगा, मेरी गैरमौजूदगी में उसका ख्याल रखना!!
किस हक़ से करूँ गिला की वो मुझे याद नहीं करता,
मुझे याद रहेगा वो, तू बस मुझे उसकी खबर देते रहना!!
नहीं मुमकिन की ज़िंदा रहते मैं उसको भुला पाऊँ,
गर हो मुमकिन, बन के उसकी खुशबु मेरी सांसों में रवां होना!!
रुक जाएँ साँसे मेरी तो उसको इत्तिला ज़रूर करना,
उसके आंसुओं का सबब चला गया दुनिया से उसे बता देना!!
ऐ काश, उसकी दुआएं क़ुबूल और मुझे दोज़ख अता हो,
शायद आसान हों अंगारों में जल कर उसको भुला पाना!!
हिंदी कहानी/हिंदी इमोशनल कहानी/लव स्टोरी हिंदी में/
पानी गरम हो गया,हां ले जाइए अरे! दे दो ना मैं उघेले बदन खड़ा हूं ठंड लग रही है। अच्छा रुकिए लाती हूं।फिर क्या रीमा आटा लगे हाथ से पानी क...

