1. सफलता की कहानी एक-दो रात में नही लिखी जाती है. अनगिनत रातों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर पढ़ना पड़ता है. हर दिन निराशा, उदासी, समाज के ताने जैसी मुसीबतों से आँखे मिलाना पड़ता है. हर मुसीबत को एक अवसर में बदलना पड़ता है. अज्ञात राहों पर अकेले चलना पड़ता है. अपनी सोच को बदलना पड़ता है. IAS की तैयारी में बहुत सारा त्याग और परिश्रम करना पड़ता है.अगर मेहनत करने से कतराते हो,
तो दम किस बात का दिखाते हो, आईएएस की तैयारी के लिए पैसों की नही,आत्मविश्वास और उत्साह की जरूरत होती है. यही बात युवा लड़कियों की प्रेरणा बन गई,
एक लड़की फिर आईएएस टॉपर निकल गई.इस धरती माँ का हर कर्ज चुकाना है,
IPS बनकर इमानदारी से फर्ज निभाना है. जो आईपीएस बनने की ठानते है,
वो कब किसी का कहा मानते है.जिन्दगी में डर सबको लगता है,
पर हर कोई लक्ष्य के पीछे भगता है. जब कई जन्मों का पूण्य फलता है,
तब कोई घर में आईएएस बनता है.
2. विद्यार्थी को स्वयं की क्षमता का ज्ञान होना चाहिए कि मेरी पढ़ाई का जो बैकग्राउंड है. उसके हिसाब से मुझे आईएएस की तैयारी के लिए प्रतिदिन कितना पढ़ना चाहिए. अगर एक दिन पढ़ाई छूटने पर आपको दुःख नही हो रहा है तो आपमें एकाग्रता की कमी है. IAS की तैयारी के लिए आपको पढ़ाई से प्रेम करना होगा. प्रेम इंसान को त्याग, ईमानदारी, परिश्रम सब करना सिखा देता है. गुरू और अपने हृदय की सलाह मानी है,
आईएएस की तैयारी करने की ठानी है,
परिश्रम करके सफलता कैसे पाई जाती है
मिशाल बनकर यह पूरी दुनिया को दिखानी है. तुम तो अपने दोस्तों से घंटे भर बातें करते हो,
क्या तुम सच में आईएएस की तैयारी करते हो. जिन आँखों में दिन-रात आईएएस का ख्वाब पलता है,
उन्हें कोई न कोई सरकारी नौकरी जरूर मिलता है.
आईएएस की तैयारी करने की ठानी है,
परिश्रम करके सफलता कैसे पाई जाती है
मिशाल बनकर यह पूरी दुनिया को दिखानी है. तुम तो अपने दोस्तों से घंटे भर बातें करते हो,
क्या तुम सच में आईएएस की तैयारी करते हो. जिन आँखों में दिन-रात आईएएस का ख्वाब पलता है,
उन्हें कोई न कोई सरकारी नौकरी जरूर मिलता है.
3. सफलता की कहानी एक-दो रात में नही लिखी जाती है. अनगिनत रातों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर पढ़ना पड़ता है. हर दिन निराशा, उदासी, समाज के ताने जैसी मुसीबतों से आँखे मिलाना पड़ता है. हर मुसीबत को एक अवसर में बदलना पड़ता है. अज्ञात राहों पर अकेले चलना पड़ता है. अपनी सोच को बदलना पड़ता है. IAS की तैयारी में बहुत सारा त्याग और परिश्रम करना पड़ता है.अगर मेहनत करने से कतराते हो,
तो दम किस बात का दिखाते हो, आईएएस की तैयारी के लिए पैसों की नही,
आत्मविश्वास और उत्साह की जरूरत होती है. यही बात युवा लड़कियों की प्रेरणा बन गई,
एक लड़की फिर आईएएस टॉपर निकल गई.इस धरती माँ का हर कर्ज चुकाना है,
IPS बनकर इमानदारी से फर्ज निभाना है. जो आईपीएस बनने की ठानते है,
वो कब किसी का कहा मानते है.जिन्दगी में डर सबको लगता है,
पर हर कोई लक्ष्य के पीछे भगता है. जब कई जन्मों का पूण्य फलता है,
तब कोई घर में आईएएस बनता है.
तो दम किस बात का दिखाते हो, आईएएस की तैयारी के लिए पैसों की नही,
आत्मविश्वास और उत्साह की जरूरत होती है. यही बात युवा लड़कियों की प्रेरणा बन गई,
एक लड़की फिर आईएएस टॉपर निकल गई.इस धरती माँ का हर कर्ज चुकाना है,
IPS बनकर इमानदारी से फर्ज निभाना है. जो आईपीएस बनने की ठानते है,
वो कब किसी का कहा मानते है.जिन्दगी में डर सबको लगता है,
पर हर कोई लक्ष्य के पीछे भगता है. जब कई जन्मों का पूण्य फलता है,
तब कोई घर में आईएएस बनता है.
4. युवाओं में जागरूकता खूब बढ़ रही है. IAS की तैयारी करने वालों की संख्या प्रयागराज में दिनों-दिन बढ़ रहा है. प्रतियोगिता धीरे-धीरे कठिन होता जा रहा है. इसलिए आईएएस का लक्ष्य कम उम्र में ही बनना लेना चाहिए. ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही आईएएस के पाठ्यक्रम को पढ़ना शुरू कर देना चाहिए. आपके परिचय में जो लोग पहले से आईएएस की तैयारी कर रहे है उनका सलाह लेते रहना चाहिए. जो विद्यार्थी बिना डरे अकेले हर मुसीबत से लड़ते है,
वही आईएएस की तैयारी के लिए घर से निकलते है. जिन आँखों में IAS के ख्वाब बस जाते है,
उन आँखों में महबूबा की तस्वीर नही बस्ती है. IAS की तैयारी में विद्यार्थी इतना परिश्रम करते है,
कि निराशा और उदासी तो उनके पैर छूने आते है.
वही आईएएस की तैयारी के लिए घर से निकलते है. जिन आँखों में IAS के ख्वाब बस जाते है,
उन आँखों में महबूबा की तस्वीर नही बस्ती है. IAS की तैयारी में विद्यार्थी इतना परिश्रम करते है,
कि निराशा और उदासी तो उनके पैर छूने आते है.
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