Monday, 13 November 2023

Ishq shayari, Dard shayari, shayari, mohabbat shayari 2023

 एक शख्स है, दूर बैठा हुआ मुझको सताता बहुत बहुत है

जानता है हाल मेरा, फिर भी मुझको तड़पाता बहुत है

जानता है मरती हूं उसपे, तब भी मुझको आजमाता बहुत है

हंसता हुआ है एक चेहरा, जो मुझ को रुलाता बहुत है।।









बड़ा वक़्त गुज़रा की,
इश्क़ के सिवा कुछ किया नहीं,
कुछ मोहलत और दो मुझे,
ये नए सलीके सीखने के लिए!!

ये जो मेरा वहम सा है,
ज़रा पैरहन से झाड़ने दो मुझे,
बाकी जो दिल में है,
उसे वक़्त चाहिए निकालने के लिए!!

तुम तो बदले पर हर कोई,
ऐसा दिलदार कहाँ होता है,
लोग मेरे जैसे भी हैं,
जिन्हें वक़्त लगता है बदलने के लिए!!

रम गया हूँ उन लम्हों में मैं,
क़ैद होता है भंवरा पंखुड़ियों में जैसे,
बस उस सुबह का इंतज़ार मुझे,
इन अँधेरी दीवारों से रिहाई के लिए!!

मेरे बातों से सहमत न भी हो,
पर प्यार तो तुम्हें भी था,
उस प्यार का वास्ता है तुम्हें,
मुझे वक़्त दो ज़रा ढलने के लिए!!

ये जो मर्ज़-ए-इश्क़ है,
परेशान इससे मैं खुद भी हूँ,
पर अब हो तो गया है,
लगेंगे कुछ रोज़ अभी ठीक होने के लिए!!

जो भी किया ज़िन्दगी में,
मेरे दोस्त बेइंतिहां किया मैंने,
मेरे जज़्बातों को कुछ वक़्त तो दो,
जल के ख़ाक होने के लिए!!

गिनते हैं आखिरी कुछ साँसे,
ये घायल पड़े जज़्बात मेरे,
क़ब्र तैयार है इनकी मेरे यार,
ज़रा कंधा तो दो दफनाने के लिए!!




मैं तो वो परिंदा हूँ जिसकी न कोई शाख है
न ही आसमां कोई,
इस जहां में न मिला अपना, और उस जहां में
है बसता कहाँ मेरा कोई!!

सूखे ठूँठ पर बना के आशियाना अपनी तो
जैसे तैसे होती है गुज़र,
चाँद तारों से होती है बात रोज़, पर सिरहाने
रखता नहीं हाथ कोई!!

वैसे तो आदत थी मेरी अकेले ही होती थी
मजे से गुज़र,
कोई आ के छुड़ा गया ये आदत मेरी, उसके बाद से
नहीं है उसकी भी खबर कोई!!

शायद अब किसी और की ज़िन्दगी का सहारा
बन गया हो वो,
वो खुश है तो यही तो थी दुआ मेरी, नहीं है मुझे
उससे गिला कोई!!




ऐ हवा, तू उनके कूँचों से तो अब भी गुज़रती होगी,
अपने झोंकों से उसकी ज़ुल्फ़ों को सहलाती होगी!!

उसके गालों, उसकी हथेलियों को छु के गुज़रती होगी,
उसकी ठंडी पड़ी तमन्नाओ को एक बार फिर जगाती होगी!!

क्या करती है तू कभी गुफ़्तगू उनसे मेरी तरह,
क्या वो भी बेक़रार है मुझसे मिलने के लिए मेरी तरह!!

या फिर अब भी मुझसे नफरत है उन्हें मेरी तरह,
भूल चुकी है या अब भी याद करती है वो मुझे मेरी तरह!!

ऐ हवा, हो सके तो उसे मेरा पैग़ाम दे देना,
अब भी जागता हूँ रातों में ज़रा उससे कह देना!!

दुआ अब भी करता हूँ उसकी खुशिओं के लिए,
मेरी तरफ से उसके सर पे ज़रा अपना हाथ रख देना!!

मेरा कोई ठिकाना नहीं, जाने कब कहाँ चला जाऊं,
तेरा एहसान होगा, मेरी गैरमौजूदगी में उसका ख्याल रखना!!

किस हक़ से करूँ गिला की वो मुझे याद नहीं करता,
मुझे याद रहेगा वो, तू बस मुझे उसकी खबर देते रहना!!

नहीं मुमकिन की ज़िंदा रहते मैं उसको भुला पाऊँ,
गर हो मुमकिन, बन के उसकी खुशबु मेरी सांसों में रवां होना!!

रुक जाएँ साँसे मेरी तो उसको इत्तिला ज़रूर करना,
उसके आंसुओं का सबब चला गया दुनिया से उसे बता देना!!

ऐ काश, उसकी दुआएं क़ुबूल और मुझे दोज़ख अता हो,
शायद आसान हों अंगारों में जल कर उसको भुला पाना!!






















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