Saturday, 20 January 2024

हिंदी कहानी/हिंदी इमोशनल कहानी/लव स्टोरी हिंदी में/

  पानी गरम हो गया,हां ले जाइए अरे! दे दो ना मैं उघेले बदन खड़ा हूं ठंड लग रही है। अच्छा रुकिए लाती हूं।फिर क्या रीमा आटा लगे हाथ से पानी का भगोना पकड़ा आई।इतने में कमरे से आवाज़ आई,बहूं एक गिलाग गरम पानी दे दो दवा खाना है ,जी मां जी लाई वो पकड़ा ही रही थी कि बेटे ने आवाज़ लगाई मां नाश्ता बन गया क्या?

देर हो रही है जल्दी करो वरना मैं जा रहा हूं। आवाज़ सुन कर वो दौड़ती सी अरे! नहीं जाओ मत बन गया है ये लो और चाय पकड़ाते हुए ये लो पियो और थोड़ा सा एक रोल किया पराठा भी कि इसे खा ले नही तो बहुत देर तक भूखों रहना पड़ेगा।

कहते हुए टिफिन बैग में रख दी और पुन: रसोई की तरफ मुड़ गई।और रमेश के लिए नाश्ता लगाने लगी। इतने में बेडरूम से आवाज़ आई, सुनों नाश्ता यही पर दे दो मैं ब्लोअर के सामने बैठा हूं प्लीज दे दो बहुत ठंड लग रही।

कहते हुए वो कपड़े पहनने लगा।

इतने में नाश्ते की प्लेट लिए वो कमरे में दाखिल हुई और रमेश की निगाह उस पर टिक गई।

बिखरे हुए बाल , सर से कमर तक खुद को साल में समेटे इस उम्र में भी वो बहुत खूबसूरत लग रही थी।ऐसे में वो भला खुद पर काबू कैसे रख पाता उसने नाश्ते की प्लेट टेबल पर रखते हुए अपनी बाहों में भर कर उंगलियों पर ठुंढ़ी को टिका आंखों में आंखें डाल बोला। तुम्हें ठंड नहीं लगती।इस पर झुकी हुई नज़रो को हौले से उठा एक हल्की सी मुस्कान के साथ धीरे से बोली बिल्कुल नहीं आपके प्यार की गरमाहट जो मेरे पास है।इसकी गरमाहट जिसके पास हो उसके आस-पास ठंड फटकती भी नहीं लगने की बात तो दूर की है। कहते हुए खुद को उसकी बाहों से आज़ाद करती हुई , नाश्ता कीजिए कह रसोई की ओर बढ़ गई।

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    पानी गरम हो गया,हां ले जाइए अरे! दे दो ना मैं उघेले बदन खड़ा हूं ठंड लग रही है। अच्छा रुकिए लाती हूं।फिर क्या रीमा आटा लगे हाथ से पानी क...